Section 21A Hindu Marriage Act - Power to transfer petitions in certain cases

Hindu Marriage Act(HMA) Section 21A

Description of Hindu Marriage Act(HMA) Section 21A

(1) Where—

(a) a petition under this Act has been presented to a district court having jurisdiction by a party to a marriage praying for a decree for judicial separation under section 10 or for a decree of divorce under section 13, and

(b) another petition under this Act has been presented thereafter by the other party to the marriage praying for a decree for judicial separation under section 10 or for a decree of divorce under section 13 on any ground, whether in the same district court or in a different district court, in the same State or in a different State, the petitions shall be dealt with as specified in sub-section (2).

(2) In a case where sub-section (1) applies,—
(a) if the petitions are presented to the same district court, both the petitions shall be tried and heard together by that district court;

(b) if the petitions are presented to different district courts, the petition presented later shall be transferred to the district court in which the earlier petition was presented and both the petitions shall be heard and disposed of together by the district court in which the earlier petition was presented.

(3) In a case where clause (b) of sub-section (2) applies, the court or the Government, as the case may be, competent under the Code of Civil Procedure, 1908 (5 of 1908), to transfer any suit or proceeding from the district court in which the later petition has been presented to the district court in which the earlier petition is pending, shall exercise its powers to transfer such later petition as if it had been empowered so to do under the said Code.

हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 21A क्या है

कुछ मामलों में अर्जियों को अन्तरित करने की शक्ति
विवरण

(1) जहाँ
(क) इस अधिनियम के अधीन कोई अर्जी अधिकारिता रखने वाले जिला न्यायालय में विवाह के किसी पक्षकार द्वारा धारा 10 के अधीन न्यायिक पृथक्करण की डिक्री के लिए या धारा 13 के अधीन विवाह-विच्छेद की डिक्री के लिए प्रार्थना करते हुए पेश की गई है; और

(ख) उसके पश्चात् इस अधिनियम के अधीन कोई दूसरी अर्जी विवाह के दूसरे पक्षकार द्वारा किसी आधार पर धारा 10 के अधीन न्यायिक पृथक्करण की डिक्री के लिये या धारा 13 के अधीन विवाह-विच्छेद की डिक्री के लिए प्रार्थना करते हुए, चाहे उसी जिला न्यायालय में अथवा उसी राज्य के या किसी भिन्न राज्य के किसी भिन्न जिला न्यायालय में पेश की गई है, वहाँ ऐसी अर्जियों के सम्बन्ध में उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट रीति से कार्यवाही की जाएगी।

(2) ऐसे मामले में जिसे उपधारा (1) लागू होती है :

(क) यदि ऐसी अर्जियाँ एक ही जिला न्यायालय में पेश की जाती हैं तो दोनों अर्जियों का विचारण और उनकी सुनवाई उस जिला न्यायालय द्वारा एक साथ की जाएगी

(ख) यदि ऐसी अर्जियाँ भिन्न-भिन्न जिला न्यायालयों में पेश की जाती हैं तो बाद वाली पेश की गई अर्जी उस जिला न्यायालय को अन्तरित की जाएगी जिसमें पहले वाली अर्जी पेश की गई थी, और दोनों अर्जियों की सुनवाई और उनका निपटारा उस जिला न्यायालय द्वारा एक साथ किया जाएगा जिसमें पहले वाली अर्जी पेश की गई थी ।

(3) ऐसे मामले में, जिसे उपधारा (2) को खण्ड (ख) लागू होता है, यथास्थिति, वह न्यायालय या सरकार, जो किसी वाद या कार्यवाही को उस जिला न्यायालय से, जिसमें बाद वाली अर्जी पेश की गई है, उस न्यायालय को जिसमें पहले वाली अर्जी लम्बित है, अन्तरित करने के लिये सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन सक्षम है, ऐसी बाद वाली अर्जी का अन्तरण करने के लिए अपनी शक्तियों का वैसे ही प्रयोग करेगी मानो वह उक्त संहिता के अधीन ऐसा करने के लिए सशक्त की गई है ।

Prev Next