Section 5 Hindu Marriage Act - Conditions for a Hindu marriage

Hindu Marriage Act(HMA) Section 5

Description of Hindu Marriage Act(HMA) Section 5

A marriage may be solemnized between any two Hindus, if the following conditions are fulfilled, namely:
(i) neither party has a spouse living at the time of the marriage;
1(ii) at the time of the marriage, neither party— (a) is incapable of giving a valid consent to it in consequence of unsoundness of mind; or
1. Subs. by Act 68 of 1976, s. 2, for clause (ii) (w.e.f. 27-5-1976).5
(b) though capable of giving a valid consent, has been suffering from mental disorder of such a kind or to such an extent as to be unfit for marriage and the procreation of children; or
(c) has been subject to recurrent attacks of insanity
(iii) the bridegroom has completed the age of 2 and the bride, the age of 3 at the time of the marriage;
(iv) the parties are not within the degrees of prohibited relationship unless the custom or usage governing each of them permits of a marriage between the two;
(v) the parties are not sapindas of each other, unless the custom or usage governing each of them permits of a marriage between the two;

हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 5 क्या है

हिन्दू विवाह के लिए शर्तें
विवरण

दो हिन्दुओं के बीच विवाह उस सूरत में अनुष्ठित किया जा सकेगा जिसमें कि निम्न शर्ते पूरी की जाती हों, अर्थात् –
(1) दोनों पक्षकारों में से किसी का पति या पत्नी विवाह के समय जीवित नहीं है।
(ii) विवाह के समय दोनों पक्षकारों में से कोई पक्षकार -
(क) चित्त विकृति के परिणामस्वरूप विधिमान्य सम्मति देने में असमर्थ न हो; या
(ख) विधिमान्य सम्मति देने में समर्थ होने पर भी इस प्रकार के या इस हद तक मानसिक विकार से ग्रस्त न हो कि वह विवाह और सन्तानोत्पति के अयोग्य हो; या
(ग) उसे उन्मत्तता का दौरा बार-बार पड़ता हो।
(iii) वर ने 21 वर्ष की आयु और वधू ने 18 वर्ष की आयु विवाह के समय पूरी कर ली है;
(iv) जब कि उन दोनों में से प्रत्येक को शासित करने वाली रूढ़ि या प्रथा से उन दोनों के बीच विवाह अनुज्ञात न हो, तब पक्षकार प्रतिषिद्ध नातेदारी की डिग्रियों के भीतर नहीं हैं;
(v) जब तक कि उनमें से प्रत्येक को शासित करने वाली रूढ़ि या प्रथा से उन दोनों के बीच विवाह अनुज्ञात न हो तब पक्षकार एक-दूसरे के सपिण्ड नहीं हैं।

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